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राजेन्द्र कुमार - रोमांटिक रोल के कलाकार

चाहे फिल्म आई मिलन की बेला हो या आरजू, गीत हो या गँवार, राजेन्द्र कुमार के रोमांटिक अभिनय को हमेशा ही सराहा गया। सन् 1959 से 1966 तक के अंतराल की राजेन्द्र कुमार की मुख्य भूमिका वाली प्रत्येक फिल्म सुपर हिट रहीं और कइयों ने सिल्वर और गोल्डन भी जुबली मनाया, यहाँ तक कि लोग राजेन्द्र कुमार को जुबली कुमार कहने लग गये।
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राजेन्द्र कुमार का जन्म पंजाब के सियालकोट, जो कि अब पाकिस्तान में है, में 20 जुलाई 1929 को हुआ था। उनकी पहली फिल्म जोगन (1950) थी। फिल्म जोगन में दिलीप कुमार और नरगिस जैसे बड़े सितारों ने भी काम किया था। दर्शकों के मध्य राजेन्द्र कुमार का स्थान मेहबूब ख़ान की फिल्म मदर इंडिया (1957) से बना। फिल्म मदर इंडिया में राजेन्द्र कुमार ने नरगिस के बेटे का रोल किया था। मदर इंडिया के बाद राजेन्द्र कुमार ने धूल का फूल (1959), मेरे महबूब (1963), आई मिलन की बेला (1964), संगम (1964), आरजू (1965), सूरज (1966) आदि जैसे सफल फिल्मों में काम किया। उन दिनों के निर्माताओं के लिये राजेन्द्र कुमार सोने की खान थे क्योंकि उनकी हीरो की भूमिका वाली फिल्मों की लागे कुछ ही सप्ताह में वसूल हो जाया करती थी।
यद्यपि राजेन्द्र कुमार 1960 के दशक में भारतीय रजत पट पर छाये रहे, 1970 का दशक उनके लिये प्रतिकूल रहा क्योंकि उस दशक में राजेन्द्र कुमार की गंवार (1970), तांगेवाला (1972), ललकार (1972), गाँव हमारा शहर तुम्हारा (1972), आन बान (1972) आदि फिल्में बॉक्स आफिस पर पिट गईं और उनकी मांग घटने लग गई। सन् 1970 से 1977 तक का समय उनके लिये अत्यंत दुष्कर रहा। सन् 1978 में बनी फिल्म साजन बिना सुहागन, जिसमें उनके साथ नूतन ने काम किया था, ने फिर से एक बार राजेन्द्र कुमार का समय पलट दिया और वे फिर से दर्शकों के चहेते बन गये। राज कपूर ने अपनी फिल्में संगम (1964) और मेरा नाम जोकर (1970) में बतौर साइड हीरो के उन्हें रोल दिया था। राज कपूर के साथ उन्होंने फिल्म दो जासूस (1975) में भी काम किया और उन्हें दर्शकों की सराहना मिली।
सन् 1981 में राजेन्द्र कुमार ने अपने बेटे कुमार गौरव को मुख्य भूमिका में ले कर लव्ह स्टोरी फिल्म बनाई और उसके बाद से फिल्मों से किनारा कर लिया। फिल्म लव्ह स्टोरी सुपर हिट रही परंतु उस फिल्म के बाद कुमार गौरव की कोई यादगार फिल्म नहीं बन पाई।
राजेन्द्र कुमार की मृत्यु उनके 70वें जन्मदिन के केवल 9 दिनों बाद सन् 1999 में कैंसर की बीमारी के कारण हो गई। ऐसा कहा जाता है कि उन्होंने अपने जीवन में कभी भी किसी दवा का सेवन नहीं किया।
राजेन्द्र कुमार की प्रमुख फिल्में
| फिल्म
का नाम |
प्रदर्शन
वर्ष |
फिल्म
का नाम |
प्रदर्शन
वर्ष |
| जोगन |
1950 |
शतरंज |
1969 |
| आवाज |
1956 |
तलाश |
1969 |
| तूफान
और दिया |
1956 |
धरती |
1970 |
| मदर
इंडिया |
1957 |
गँवार |
1970 |
| एक
झलक |
1957 |
गीत |
1970 |
| देवर
भाभी |
1958 |
मेरा नाम
जोकर |
1970 |
| घर
संसार |
1958 |
आप आय
बहार आई |
1971 |
| खजांची |
1958 |
आन बान |
1972 |
| तलाक |
1958 |
गाँव
हमारा
शहर
तुम्हारा |
1972 |
| चिराग
कहाँ रोशनी
कहाँ |
1959 |
गोरा और
काला |
1972 |
| धूल
का फूल |
1959 |
ललकार |
1972 |
| दो
बहन |
1959 |
तांगेवाला |
1972 |
| गूंज
उठी शहनाई |
1959 |
दो शेर |
1974 |
| संतान |
1959 |
दुख भंजन
तेरा नाम |
1974 |
| कानून |
1960 |
दो जासूस |
1975 |
| माँ
बाप |
1960 |
रानी और
लालपरी |
1975 |
| मेंहदी
रंग लाग्यो |
1960 |
सुनहरा
संसार |
1975 |
| पतंगा |
1960 |
तेरी मेरी
जिंदगी |
1975 |
| आस
का पंछी |
1961 |
मजदूर
जिंदाबाद |
1976 |
| धर्मपुत्र |
1961 |
दो शोले |
1977 |
| घराना |
1961 |
शिरडी के
साईं बाबा |
1977 |
| प्यार
का सागर |
1961 |
आहुति |
1978 |
| ससुराल |
1961 |
साजन बिना
सुहागन |
1978 |
| जिंदगी
और ख़्वाब |
1961 |
सोने
का दिल
लोहे का हाथ |
1978 |
| अकेली
मत जइयो |
1963 |
डाकू
और महात्मा |
1978 |
| अमर
रहे ये प्यार |
1963 |
बिन फेरे
हम तेरे |
1979 |
| दिल
एक मंदिर |
1963 |
ओह बेवफ़ा |
1980 |
| गहरा
दाग |
1963 |
धन दौलत |
1980 |
| हमराही |
1963 |
बदला और
बलिदान |
1980 |
| मेरे
महबूब |
1963 |
गुनहगार |
1980 |
| आई
मिलन की बेला |
1964 |
ये रिश्ता
ना टूटे |
1981 |
| संगम |
1964 |
लव्ह
स्टोरी |
1981 |
| जिंदगी |
1964 |
साजन की
सहेली |
1981 |
| आरजू |
1965 |
मैं तेरे
लिये |
1988 |
| सूरज |
1966 |
क्लर्क |
1989 |
| अमन |
1967 |
फूल |
1993 |
| पालकी |
1967 |
दिया और
तूफान |
1995 |
| झुक
गया आसमान |
1968 |
अंदाज़ |
1995 |
| साथी |
1968 |
अर्थ |
1998 |
| अंजाना |
1969 |
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