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मोहम्मद रफ़ी

मोहम्मद रफ़ी, जो कि रफी साहब के नाम विख्यात हैं, किसी परिचय के मुहताज नहीं हैं। हिंदी फिल्मों का शौक रखने वाला शायद ही कोई ऐसा व्यक्ति होगा जो उनके नाम से परिचित नहीं हो। मोहम्मद रफ़ी साहब का जन्म कोटला सुल्तानसिंह (अमृतसर के पास) में 25 दिसंबर 1925 को हुआ था पर उनका बचपन लाहौर में बीता। वहाँ पर उन्होंने उस्ताद अब्दुल वाहिद खान से संगीत की शिक्षा प्राप्त की।
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रफी जी ने फिल्मों के लिये पहली बार सन् 1944 में गाना गाया, वह गाना पंजाबी फिल्म गुल बलोच के लिये था। बाद में प्रसिद्ध संगीतकार नौशाद से प्रेरणा पाकर उन्होंने हिंदी फिल्म पहले आप के लिये गीत रेकार्ड किया पर उन्हें लोकप्रियता मिली फिल्म अनमोल घड़ी के गाने से जिसके बोल थे तेरा खिलौना टूटा। सन् 1951 में बनी फिल्म बैजू बावरा, जिसके संगीत निर्देशक भी नौशाद थे, में गाये गानों ने मोहम्मद रफी को लोकप्रियता के शिखर ला कर खड़ा कर दिया।
मोहम्मद रफी ने अपने जमाने के प्रायः सभी संगीतकारों, जैसे कि नौशाद, सचिनदेव बर्मन, खैयाम, जयदेव, मदन मोहन, शंकर जयकिसन, ओ.पी. नैयर, कल्याणजी आनन्दजी, लक्ष्मीकांत प्यारेलाल आदि, के निर्देशन में गीत गाये हैं तथा उनके गाये गीत उस जमाने के प्रायः सभी जाने माने अभिनेताओं, जैसे कि अशोक कुमार, राज कपूर, गुरु दत्त, दिलीप कुमार, देवानंद, भारत भूषण, जॉनी वॉकर, जॉय मुखर्जी, शम्मी कपूर, राजेन्द्र कुमार, राजेश खन्ना, अमिताभ बच्चन, धर्मेन्द्र, जीतेन्द्र, ऋषि कपूर आदि, पर फिल्माये गये हैं। यहाँ तक कि उन्होंने प्रसिद्ध गायक किशोर कुमार के लिये भी पार्श्वगायन का काम किया है। वे प्रत्येक हीरो के लिये अलग अलग अंदाज में गाने गाते थे। मोहम्मद अजीज, सोनू निगम, उदित नारायण आदि गायक भी उनकी आवाज से बेहद प्रभावित रहे हैं।
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