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मधुबाला एक अपूर्व आकर्षक अभिनेत्री

यह कहने में जरा भी झिझक नहीं होनी चाहिये कि मधुबाला अपने समय की सर्वाधिक आकर्षक अभिनेत्री थीं। न केवल बेहतरीन अभिनय बल्कि बेपनाह हुस्न के लिये भी मधुबाला को हमेशा याद किया जायेगा।
मधुबाला का असली नाम मुमताज़ जहाँ बेगम देहलवी था। उनका जन्म एक गरीब मुस्लिम परिवार में हुआ था और वे अपने माता पिता के 11 संतानों में पाँचवीं संतान थीं। मधुबाला के विषय में एक मौलवी ने भविष्यवाणी की थी कि उसे अपने जीवन में धन तथा यश की प्राप्ति होगी परंतु सुख नहीं मिल पायेगा और कम उम्र में ही उसकी मृत्यु हो जायेगी। मधुबाला के पिता का नाम अताउल्लाह ख़ान था और वे दिल्ली में तांगा चलाया करते थे। बाद में वे अधिक आमदनी की उम्मीद में बंबई (वर्तमान मुंबई) आ गये। एक साल के संघर्ष के बाद मुमताज को बांबे टाकीज़ में बाल कलाकार का काम मिल गया।
फिल्म बसंत (1942) में, जो मुमताज की पहली फिल्म थी, मुमताज के अभिनय ने देविका रानी को बहुत प्रभावित किया। बाद में आने वाली फिल्मों के लिये देविका रानी ने मुमताज का नाम बदल कर मधुबाला रख दिया। उसके बाद फिल्म ज्वार भाटा (1944) में, जिसके हीरो दिलीप कुमार थे, मधुबाला ने एक किरदार निभाया।
सन् 1947 में केदार शर्मा ने अपनी फिल्म नील कमल में मधुबाला को हीरोइन की भूमिका दिया। हीरो राज कपूर थे। राज कपूर और मधुबाला दोनों के लिये ही यह मुख्य भूमिका वाली पहली फिल्म थी। नील कमल चल निकली दोनों ही स्थापित कलाकार बन गये। मधुबाला बांबे टाकीज़ स्थाई कलाकार बन गईं। सन् 1949 में बांबे टाकीज की फिल्म महल प्रदर्शित हुई जिसमें मुख्य भूमिका अशोक कुमार और मधुबाला की थी। महल सुपर हिट हुई। फिल्मों में प्ले बैक का सिस्टम उन दिनों नया था। महल का गीत "आयेगा आने वाला....", जिसे लता मंगेशकर ने गाया था, अत्यधिक पसंद की गई और लता मंगेशकर तथा मधुबाला को दोनों ने ही खूब ख्याति अर्जित की।
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मधुबाला ने उस जमाने के बड़े बड़े कलाकार जैसे अशोक कुमार, दिलीप कुमार, देव आनंद, रहमान आदि के साथ काम किया और उसकी लोकप्रियता दिन प्रतिदिन बढ़ती गई। हाँ 1950 के दशक के मध्य के कुछ वर्ष उसके लिये दुर्भाग्यपूर्ण रहे क्योंकि उसकी कुछ फिल्में फ्लॉप हो गई थीं पर सन् 1958 में वे फिर से एक बार बुलंदी पर पहुँच गईं जब उनकी फिल्में फागुन, हावड़ा ब्रिज, कालापानी और चलती का नाम गाड़ी सुपर हिट हुईं।
मधुबाला ने अपने अभिनय कौशल का सबसे अच्छा प्रदर्शन फिल्म मुगल-ए-आज़म (1960) में अनारकली की भूमिका निभाकर किया। मुगल-ए-आज़म के बाद मधुबाला की फिल्में थीं पासपोर्ट (1961), झुमरू (1961), ब्वाय फ्रेंड (1961), हाफ टिकिट (1962), शराबी (1964)। उनकी एक फिल्म ज्वाला तो उनकी मृत्यु के पश्चात सन् 1971 में प्रदर्शित हुई।
मधुबाला सन् 1950 से हृदयरोग से ग्रसित थीं। हार्ट सर्जरी उन दिनों उपलब्ध नहीं था। मधुबाला ने अदम्य साहस के साथ अपनी इस बीमारी का सामना किया। यहाँ तक कि चलचित्र उद्योग से सम्बंधि अधिकतर लोगों से भी अपने इस रोग को छुपाये रखा। सन् 1964 के बाद अपने हृदयरोग के कारण से वे फिल्मों में काम करने में अक्षम हो गईं। सन् 1969 में उनका स्वर्गवास हो गया।
मधुबाला अभिनीत प्रमुख फिल्में
- बगदाद का चोर - 1934
- शहीद-ए-मोहब्बत - 1936
- बसंत - 1942
- मुमताज महल - 1944
- धन्ना भगत - 1945
- राजपूतानी - 1946
- पुजारी - 1946
- फुलवारी - 1946
- सात समुंदरों की मलिका - 1947
- मेरे भगवान - 1947
- खूबसूरत दुनिया - 1947
- दिल की रानी - 1947
- चित्तौड़ विजय - 1947
- नील कमल - 1947
- पराई आग - 1948
- लाल दुपट्टा - 1948
- देश सेवा - 1948
- अमर प्रेम - 1948
- सिपहिया - 1949
- सिंगार - 1949
- पारस - 1949
- नेकी और बदी - 1949
- महल - 1949
- इम्तिहान - 1949
- दुलारी - 1949
- दौलत - 1949
- अपराधी - 1949
- परदेश - 1950
- निशाना - 1950
- निराला - 1950
- मधुबाला - 1950
- हँसते आँसू - 1950
- बेकसूर - 1950
- तराना - 1951
- सैंया - 1951
- नाज़नीन - 1951
- नादान - 1951
- खजाना - 1951
- बादल - 1951
- आराम - 1951
- साकी - 1952
- संगदिल - 1952
- रेल का डिब्बा - 1953
- अरमान - 1953
- बहुत दिन हुये - 1954
- अमर - 1954
- तीरंदाज - 1955
- नकाब़ - 1955
- नाता - 1955
- मिस्टर एण्ड मिसेज '55 - 1955
- शीरी फरहाद - 1956
- राज हठ - 1956
- ढाके का मलमल - 1956
- यहूदी की लड़की - 1957
- गेटवे आफ इंडिया - 1957
- एक साल - 1957
- पोलिस - 1958
- फागुन - 1958
- कालापानी - 1958
- हावड़ा ब्रिज - 1958
- चलती का नाम गाड़ी - 1958
- बाग़ी सिपाही - 1958
- कल हमारा है - 1959
- इंसान जाग उठा - 1959
- दो उस्ताद - 1959
- महलों के ख्वाब - 1960
- जाली नोट - 1960
- बरसात की रात - 1960
- मुगल-ए-आज़म - 1960
- पासपोर्ट - 1961
- झुमरू - 1961
- ब्वाय फ्रेंड - 1961
- हाफ टिकिट - 1962
- शराबी - 1964
- ज्वाला 1971
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