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अशोक कुमार - स्वाभाविक अभिनय के प्रतीक

अशोक कुमार को उनके स्वाभाविक अभिनय के लिये हमेशा याद किया जाता रहेगा।
आपको शायद ही पता होगा कि कुमुदलाल कांजीलाल गांगुली नामक व्यक्ति, जिसका जन्म बिहार के भागलपुर जिले में हुआ था और शिक्षा प्रेसिडेंसी कालेज, कलकत्ता (वर्तमान कोलकाता) में संपन्न हुई थी, कालांतर में फिल्म अभिनेता अशोक कुमार के नाम से प्रख्यात हुये।
अशोक कुमार बांबे स्टुडिओ में लेबोरेटरी असिस्टेंट का काम करते थे। सन् 1936 में बांबे टाकीज़ का हीरो नजाम-उल-हुसैन स्टुडिओ की हीरोइन देविका रानी, जो कि बांबे टाकीज़ के मालिक हिमांशु राय की पत्नी थीं, को लेकर भाग गया। दोनों के पकड़े जाने पर हिमांशु राय ने देविका रानी को तो माफ़ कर दिया पर नजाम-उल-हुसैन को नौकरी से निकाल दिया। हिमांशु राय उन दिनों फिल्म जीवन नैया बना रहे थे। उन्होंने स्टुडिओ के लेबोरेटरी असिस्टेंट कुमुदलाल को अशोक कुमार के नाम से अपनी फिल्म जीवन नैया में हीरो के रूप में पेश कर दिया। यह थी अशोक कुमार के फिल्मी सफर की शुरुवात।
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हिमांशु राय ने जीवन नैया के बाद उसी वर्ष फिल्म अछूत कन्या का निर्माण किया। अछूत कन्या में भी अशोक कुमार और देविका रानी मुख्य रोल में थे। यह फिल्म सुपर हिट हुई और अशोक कुमार हीरो के रूप में स्थापित हो गये। बाद में अशोक कुमार ने देविका रानी के साथ फिल्म इज्जत (1937), सावित्री (1937), एवं निर्मला (1938) में हीरो के रोल निभाया। चूँकि देविका रानी उस जमाने की फिल्म स्टार थीं, उपरोक्त सभी फिल्मों में देविका रानी के सामने अशोक कुमार फीके से पड़ जाते थे। अशोक कुमार की असली पहचान तो कंगन (1939), बंधन (1940) और झूला (1941) से बनी जिनमें वे लीला चिटनिस के साथ हीरो थे। उन दिनों कलाकारों को अपना गाना स्वयं गाना होता था क्योंकि प्ले बैक का सिस्टम था ही नहीं उस जमाने में। अशोक कुमार एक अच्छे गायक थे और उनके गाये हुये गाने बहुत लोकप्रिय हो जाते थे। निःसंदेह अपने गायन कला का अशोक कुमार ने पूरा पूरा लाभ उठाया। उनका गाया गाना "मैं बन का पंछी....." सुपर हिट हुआ।
उन दिनों के कलाकारों के अभिनय में अति नाटकीयता हुआ करती थी। अशोक कुमार ने अति नाटकीयता को त्याग कर स्वाभाविक अभिनय को अपना कर फिल्मों को एक नई दिशा दी। वे खतरा मोल लेने में तनिक भी नहीं हिचकिचाते थे इसीलिये सन् 1943 में फिल्म किस्मत में उन्होंने 'एंटी हीरो' वाले रोल को बेझिझक स्वीकार कर लिया। इसी तरह उन्होंने फिल्म ज्वेल थीफ में भी सज्जन खलनायक का रोल निभाया था।
हिमांशु राय की मृत्यु के पश्चात अशोक कुमार ने बांबे टाकीज़ के बहुत सी फिल्मों का निर्माण किया जिनमें फिल्म महल सुपर हिट हुई थी। फिल्म महल का गाना "आयेगा आने वाला...." आज भी लोकप्रिय है। सन् 1960 से अशोक कुमार ने चरित्र अभिनेता का रोल निभाना आरंभ कर दिया। वे फिल्मों में सन् 1980 तक नियमित रूप से काम करते रहे। भारत के सर्वप्रथम सोप आपेरा (टी.व्ही. सीरियल) "हम लोग" में अशोक कुमार ने सूत्रधार का रोल निभाया था।
एक अच्छे अभिनेता होने के साथ ही साथ अशोक कुमार अच्छे गायक, चित्रकार और होम्योपैथी के डॉक्टर भी थे।
90 वर्ष की उम्र तक अशोक कुमार फिल्मों में काम करते रहे और उन्होंने 275 से भी अधिक फिल्मों में काम किया। परिणीता, एक ही रास्ता, चलती का नाम गाड़ी, हावड़ा ब्रिज, बंदिनी, गुमराह, ममता, ज्वेल थीफ, आशीर्वाद, पाकीज़ा, विक्टोरिया नं. 203, छोटी सी बात, शौकीन आदि अशोक कुमार की यादगार फिल्में हैं।
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